शिक्षक की विदाई पर कविता – Teachers Farewell Poem in Hindi

Teachers Farewell Poem in Hindi – शिक्षक जिसको हम अपने माँ बाप का दर्जा देते है, और देना भी चाहिए क्यूंकि हमारे गुरु ही हमें जीवन में रहना का सही तरीका शिकाते है, जिसमे हम सही और गलत का ज्ञान प्राप्त करते है | माँ बाप जब तक देखवाल करते है जब तक बच्चा पढ़ने नही जाता, उसके बाद गुरु ही बच्चे को सही राह पर लाते है | लेकिन जहाँ गुरु अपनी शिक्षा देते है वहां से उसको एक ना दिन अवश्य विदा होना पढ़ता है | अगर आपके भी गुरु जी का आज आपके स्कूल से विदाई समारोह का दिन है और आप Poem On Teacher Farewell in Hindi देख रहे है तो आप सही जगह है यहाँ हम आपको शिक्षक विदाई कविता, टीचर विदाई कविता, Farewell Poem For Teacher in Hindi, रिटायरमेंट की कविता गुरु जी के लिए, शिक्षक विदाई समारोह कविता आदि का विशाल संग्रह पेश करेंगे जिन्हे आप शेयर करके फेयरवेल की बधाई दे सकते है |

शिक्षक विदाई समारोह कविता

शिक्षक हैं समाज, सभ्यता, संस्कृति के रक्षक
जीवन के अनजानी राहों के पथप्रदर्शक
अनमोल है इनकी कही हर वाणी
भेदभाव की नीति इन्होंने कभी ना जानी
अपने अनुभवों से नीति-न्याय की बातें सिखाते
अनुशासन का पालन करवाते
दृढ़-निश्चयी बनाते
सफलता के लिए प्रेरित करते
भटके को राह दिखाते
नसीब पर नहीं, कर्म पर भरोसा करना सिखाते
लेकर परिक्षाएँ कड़ी घड़ी-घड़ी
परिचय हमारा खुद से ये करवाते
अज्ञान दूर कर ज्ञान की ज्योत जलाते…
अपनी विद्या का करके दान…
मानवता का करते ये कल्याण
कर्त्तव्यनिष्ठ शिक्षक होते हैं
स्वयं ईश्वर के समान
शिक्षा है जिनका धर्म-ईमान
शिक्षित हो समाज है इनका गान !

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Teachers Farewell Poem in Hindi

हमारे विद्यालय के आँगन में
खिलता हुआ गुलाब हो आप
हमारे अंधियारे जीवन में
ज्ञान का दीपक हो आप ।
हम सब बच्चे थे नादान
पढ़ने में नहीं था ध्यान
हमारी भूलो को माफ करके
दे दिया विद्या का ज्ञान ।
अपनी अनमोल शिक्षा को
खेल खेल से हमें सिखाया ।
संस्कारों का पाठ पढ़ाया ।
सही गलत का ज्ञान कराया ।
हमारे निराश हारे मन में
आत्मविश्वास जगा दिया
मंजिल तक पहुंचाने का
रास्ता हमें दिखा दिया ।
टीचर जी हमारे आँगन को
छोड़कर जा रहे हो आप
जीवन में सदा खुश रहो
यही है हमारी प्रभू से आस
अपनी खुशबू से महकातो रहो
सबकी बगिया को आप

शिक्षक विदाई समारोह की कविता

मैं तो कोरा कागज था
उसने अपनी कलम से
नाम मेरा लिख दिया
वही तो मेरा शिक्षक है ।
राह दिखाई चलने की
जीवन का लक्ष्य दिखाकर
मंजिल तक पहुँचा दिया
वही तो मेरा शिक्षक है ।
पग पग पर मार्गदर्शन करके
नई नई बातें सिखाकर
आदर्शों का पाठ पढ़ा दिया
वही तो मेरा शिक्षक है ।
मेरे अबोध अज्ञानी मन को
सत्य का उजाला देकर
ज्ञानी मुझे बना दिया
वही तो मेरा शिक्षक है ।
सही गलत का भेद बताकर
जीवन को नए आयाम देकर
संस्कारों का पाठ पढ़ा दिया
वही तो मेरा सच्चा शिक्षक है ।

सेवानिवृति पर कविता

आये संग बहार लिये, जा रहे उसे ले साथ कहाँ?
पूछ रहा यह चमन ‘तरुण’ बोलो मेरा गुलजार कहाँ?
बेलि लगायी शिक्षा की सींचे इसको श्रम जल से तुम,
पनपी हरियाली ले फूली खुशबू भी दे जाते तुम।
आया था उल्लास नया, चेतना नयी लहरायी जो,
गम जड़ता का भार दिये जा रही थी दिल बहलाती जो।
उगे ‘अरुण’ जो विभा ‘तरुण’ से ले प्रकाश फैलाने को,
दूर हुए जाते क्यों फैलाते तुम पुंज पहारों को।
दीप जलाये शिक्षक उर में आशा के, नवजीवन के,
सेवा निवृति के विरह झकोरे पवन चले उत्पीड़ण के।
गाऊँ क्या दिल उमग न पाता प्यारे जीना सुख पाना,
नेह-लता मुरझा नहीं जाये सिंचन सुधि लेते रहना

शिक्षक विदाई समारोह गीत 

अपने ज्ञान के प्रकाश को,
सबमें बांटता शिक्षक
कांच के टुकड़े उठाकर,
हीरे-सा तराशता शिक्षक
हर क्रिया, प्रतिक्रिया को देख,
हर नजर से जांचता शिक्षक
संस्कारों के बीज बोकर,
आदर्शों की फसल काटता शिक्षक
अंधकार में दीप जलाकर,
अज्ञानता की खाई पाटता शिक्षक
जीवन मूल्यों को सिखाता,
जिंदगी संवारता शिक्षक
शिष्य को आगे बढ़ाकर,
खुद को उसपे वारता शिक्षक

विदाई समारोह का भाषण अध्यापक

वो लम्हें जो मेरी ज़िंदगी के अनमोल पल बन गये,
वो लम्हें जो मेरे गुज़रे हुये कल बन गये,
काश इन लम्हों को मैं फिर से जी पाता,
वो लम्हें जो मेरी नम आँखो के जल बन गये.
आँखों में सपने और दिल में अरमान लिये,
एक सफ़र में चल पड़े बिना किसी का साथ लिये,
रास्ते में कुछ नये चेहरों से मुलाकात हो गई,
फिर तो वो ऐसे दोस्त बने जैसे एक रिश्ता हो उम्र भर के लिये.
वो लम्हें जो मुझे चाहने वाले मेरे दोस्त दे गये,
वो लम्हें जो ना भूला पाने वाले कुछ लोग दे गये.
इस सफ़र की शुरुआत हमने साथ की थी,
जान से प्यारे यारों के साथ कितनी सारी बात की थी,
ज़िंदगी के उन पलों को भी हमने साथ जिया था,
जिन पलों ने खुशी और गम दोनो से मुलाकात की थी.
वो लम्हें जो अब लौट के नहीं आ सकते,
वो लम्हें जहाँ हम चाह के भी नहीं जा सकते.
अपने यारों के दिल की बात हम बिना कहे जान लेते थे,
कौन पसंद है किसको ये थोड़े से झगड़े के बाद हम मान लेते थे,कैंटीन और कैफ़े की पार्टियां तो रोज़ हुआ करती थी,
खूबसूरत लड़कियों को कॉल कर,
ना जाने कितने नाम लिया करते थे.
वो लम्हें जो एक धुंधली याद बन गये,
वो लम्हें जो एक यादगार किताब बन गये.कॉलेज आने का मन नहीं फिर भी कॉलेज आया करते थे,
कुछ लोगों को गर्ल फ्रेंड और बाकियों को टीचर बुलाया करते थे,
एग्जाम देने की तो जैसे आदत सी हो गई थी,
फिर रिज़ल्ट देख के कुछ रोते तो कुछ मुस्कुराया करते थे.

अजीब थे ये लम्हें जिसमें हम हँसे भी और रोये भी,
अजीब थे ये लम्हें जिसमें कुछ पाये भी और कुछ खोये भी.
इन लम्हों को एक याद बना के अपने साथ ले जाउँगा,
इन लम्हों की दास्तान फिर किसे सुनाऊंगा, क्योंकि…….
क्या इन लम्हों को मैं फिर से जी पाउँगा?
क्या ऐसे माहौल में मैं फिर से वापस आ पाउँगा?
क्याये कविता इस स्टेज पे मैं फिर से सुना पाउँगा?
मैं जानता हूँ इसका जवाब तो ना ही होगा,
क्योंकि लिखी हुई किताब को मैं फिर से कोरा कैसे कर पाउँगा.
बस इन लम्हों को अपने दिल मे बसा लूँगा,
और जब याद आयेगी आप सबकी तो नम आँखो के साथ मुस्कुरा लूँगा.

आशु है मेरा नाम और ये था मेरे सीनियर’स के लिए एक छोटा सा पैगाम

Short Poem On Teacher Farewell In Hindi

गुरूदेव के श्रीचरणों में
श्रद्धा सुमन संग वंदन
जिनके कृपा नीर से
जीवन हुआ चंदन
धरती कहती, अंबर कहते
कहती यही तराना
गुरू आप ही वो पावन नूर हैं
जिनसे रौशन हुआ जमाना

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